हिन्दीमराठीગુજરાતીEnglish
बच्चों की कुंडली0 से 13 वर्ष — ग्रहों के अनुसार परवरिश
सिर्फ़ बच्चों के लिए · 0 – 13 वर्ष

आपके बच्चे की
कुंडली, बच्चों की भाषा में

लड़का हो या लड़की — शास्त्र बच्चे के बारे में क्या कहता है: नाम किस अक्षर से रखें, बचपन के संस्कार कब और कैसे करें, और जन्म-नक्षत्र से बच्चे का स्वभाव। सब माँ-बाप की भाषा में।

अभी पढ़िए

बच्चों के लिए जो जन्म-कुंडली में देखा जाता है

माँ-बाप पूछते हैं

जो सवाल सबसे पहले आता है

क्या इतनी छोटी उम्र में कुंडली देखना ठीक है?
कुंडली यहाँ भविष्य बताने के लिए नहीं, परवरिश समझने के लिए है। बच्चा किस तत्त्व का है, ग़ुस्से में कैसे सँभलेगा, पढ़ाई किस तरह पकड़ेगा — शास्त्र इन बातों पर बहुत कुछ कहता है, और यही काम का हिस्सा है।
क्या डरने वाली बातें भी लिखी होंगी?
नहीं। इस पन्ने पर एक छननी लगी है जो उम्र के हिसाब से तय करती है कि क्या कहा जाएगा। विवाह, नौकरी, आयु, मृत्यु जैसी बातें बच्चों के पाठ में कभी नहीं आतीं — गणना में रहती हैं, पाठ में नहीं।
जन्म का ठीक समय नहीं पता तो?
समय जितना पास होगा उतना पाठ पक्का होगा। लग्न और चरण समय से बदलते हैं, इसलिए अस्पताल का काग़ज़ या घर की डायरी एक बार देख लीजिए।
13 वर्ष के बाद क्या?
उसके बाद यह पाठ छोटा पड़ जाता है — तब पूरी कुंडली पढ़ी जाती है, जिसमें इस उम्र से आगे की बातें भी शामिल होती हैं।